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कहाँ है वह रुख़-ए-माहताब..
जिसका नज़र आ रहा है नूऱ!

- मनोज 'मानस रूमानी'
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खिलें हैं ग़ुलाबी टयुलिप बाग़-ए-कश्मीर..
मुझे लगतें हैं जैसे खिल उठें हसींन दिल!


- मनोज 'मानस रूमानी'
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ये ख़ूबसूरत नज़ारा
हसीन रंगीन समां
ढूँढता हूँ मै खोया..
रह गया प्यार मेरा!


- मनोज 'मानस रूमानी'
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"मौसम आशिक़ाना हो..
और दिल शायराना हो!"


- मनोज 'मानस रूमानी'

'वर्ल्ड पोएट्री डे' सभी को मुबारक़!
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अच्छें दिन वालें देख रहें बुरें दिन..
बुरें दिन वालें देख रहें अच्छे दिन.!


- मनोज 'मानस रूमानी'
सियासतदारों से बेहद ख़फ़ा हैं दोनों तरफ़
आवाम में आपसी मोहब्बत है दोनों तरफ़!

- मनोज 'मानस रूमानी'