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दशहरा की शुभकामनाएं।

- मनोज कुलकर्णी
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यादों के झरोखे से.!रूमानियत भरा था लिखना..
मिज़ाज भी हमारा शायराना!
शुक्रग़ुज़ार हूँ हुस्नवालों का..
कि शायर रूमानी बना दिया!


- मनोज 'मानस रूमानी'
पैग़ाम!

होली मुबाऱक सरहद पार भी दिखायी दी 
धर्म-निरपेक्षता की बात वहां भी गूँजी..
शायरी, रफ़ी आवाज़ की चाहत भी सुनी 
अब बस प्यार ही फ़ैले दोनों तऱफ ही !

भाईचारा, मोहब्बत की बात भा गयी 
इंतज़ार है यह दिलों का मिलन ही.. 
मिटा दे इस-उस पार की दूरी भी.. 
अब बस प्यार ही फ़ैले दोनों तऱफ ही !

एक है जड़, ज़ुबान संस्कृति हमारी 
दुनियाँ में मिसालें है फिर जुड़ने की..
काश यह ख़्वाब हो जाए हक़ीक़त भी 
अब बस प्यार ही फ़ैले दोनों तऱफ ही!

- मनोज 'मानस रूमानी'
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मिसाल-ए-मोहब्बत ताज़
दुनियाँ में हमारे पास!
मिटाएं जहाँ की नफ़रत
सिखाएं सबको प्यार! 

- मनोज 'मानस रूमानी'
शबाब!

नज़ाक़त से भरी यह चाल, अदाएं 
हवा का रुख़ बदलती रेशमी जुल्फ़ें
बेशुमार प्यार भरी पंखुड़ियों सी आँखे 
दिल-ए-आशिक़ संभल जाए भी कैसे?

ग़ुलाबों रंगत लिए लबों की बहारें
गाल पर तिल की बचे नज़रों से 
ज़ीनत तुम गुलशन-ए-हुस्न से 
दिल-ए-आशिक़ संभल जाए भी कैसे?

- मनोज 'मानस रूमानी'
मोहब्बत में सब जहाँ प्यारा लगता 
नहीं तो कुछ भी ग़वारा नहीं लगता 

- मनोज 'मानस रूमानी'
"हो मोहब्बत का गेरुआ
पर ना भाये केसरिया!
हम तो चाहे हमारा..
तीन रंगों का प्यारा!
और याद आ रहा है..
'रंग दे बसंती चोला'!"

- मनोज 'मानस रूमानी'
सलामत रहे!

"पढ़ना, लिखना, संगीत, कलाएँ..
अच्छे ख़ूबसूरत ज़िन्दगी के लिए
इंसानियत, प्यार फ़ैले जिससे...
नहीं छीनना यह किसीसे...!"

- मनोज 'मानस रूमानी'
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बहती रहे अमन की हवा ऐसी नसीम
सरहदों के पार जहाँ के मिला दे दिल

- मनोज 'मानस रूमानी'
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"उर्दू ज़ुबान, शायरी की मिठास 
हुस्न-इश्क़ का दिलक़श साज़.. 
तहज़ीब, अदब की नवाबी शान 
देखेंगे लख़नऊ का यह अंदाज़!" 
- मनोज 'मानस रूमानी'
"काश आप रहनुमा होते
राह भटके ज़िन्दगी के.!
हमराह यूँ  हसींन होते..
इश्क़ में भी शरीक़ होते!"
- मनोज 'मानस रूमानी'
"रह गया करना इज़हार-ए-मोहब्बत
समां भी चला गया..हाय रे क़िस्मत!"

- मनोज 'मानस रूमानी'